नई दिल्ली: देश भर में नीट (NEET) परीक्षा और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली को लेकर चल रहे भारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है।
शिक्षा मंत्री के इस अचानक लिए गए फैसले से देश के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब जंतर-मंतर पर विभिन्न छात्र संगठनों का आंदोलन उग्र रूप ले चुका था और सरकार के प्रतिनिधियों के साथ छात्रों की तीसरे दौर की औपचारिक वार्ता प्रस्तावित थी।
छात्रों के विरोध के आगे झुकी सरकार!
गौरतलब है कि पिछले कुछ हफ़्तों से नीट-यूजी और अन्य परीक्षाओं में कथित पेपर लीक तथा अनियमितताओं को लेकर देशभर के छात्र और अभिभावक सड़कों पर थे। छात्र संगठन लगातार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और पूरी परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग कर रहे थे।
सूत्रों के अनुसार, धर्मेंद्र प्रधान ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने की पेशकश की है। अपने त्यागपत्र में उन्होंने लिखा कि “देश के लाखों युवाओं और छात्रों का भविष्य किसी भी पद से ऊपर है। परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता और छात्रों का भरोसा बहाल करना ही पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।”

परीक्षा प्रणाली में सुधार की कही बात
अपने इस्तीफे के साथ जारी पत्र में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार धांधली के आरोपियों पर सख्त कार्रवाई, मामले की सीबीआई जांच और आगामी परीक्षाओं में कम्प्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) जैसी पारदर्शी व्यवस्था लागू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
फिलहाल राष्ट्रपति भवन से नए शिक्षा मंत्री के नाम की आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है।
मुख्य बिंदु:
नीट (NEET) परीक्षा विवाद और देशव्यापी छात्र आंदोलन के बीच लिया फैसला।
प्रधानमंत्री को भेजा इस्तीफा; नैतिक जिम्मेदारी का दिया हवाला।
छात्र प्रतिनिधियों के साथ वार्ता से ठीक पहले हुआ बड़ा घटनाक्रम।
