डिप्लोमा इंजीनियर्स
रामनगर: अपनी 27 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलनरत उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ का गुस्सा सातवें आसमान पर है। मंगलवार को आंदोलन के 16वें दिन इंजीनियरों ने न केवल सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, बल्कि अपना आक्रोश जताते हुए राजकीय महाविद्यालय में चल रहे निर्माण कार्य को भी बंद करवा दिया।
9 महीने से आश्वासन, पर समाधान नहीं
लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह के बाहर धरने पर बैठे इंजीनियरों ने कहा कि वे पिछले 9 महीनों से अपनी जायज मांगों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस दौरान महासंघ का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन से भी मुलाकात कर चुका है, लेकिन शासन स्तर से अभी तक केवल आश्वासन ही मिला है, धरातल पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई।
मजबूरी में उठाना पड़ा कड़ा कदम
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद विकास कार्यों में बाधा डालना नहीं है, लेकिन सरकार की बेरुखी उन्हें उग्र कदम उठाने पर मजबूर कर रही है।
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कार्य बहिष्कार: विरोध स्वरूप आज इंजीनियरों ने राजकीय महाविद्यालय में चल रहे सरकारी निर्माण कार्य को मौके पर पहुंचकर रुकवा दिया।
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चेतावनी: महासंघ ने साफ तौर पर कहा है कि यदि जल्द ही उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो यह आंदोलन और भी उग्र रूप लेगा जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
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