'प्रवासी पंचायत'
पलायन आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. नेगी ने दी जानकारी; पिथौरागढ़ से होगी शुरुआत, स्थानीय आर्थिकी को मजबूत करने पर जोर।
देहरादून: उत्तराखंड में पहाड़ों से पलायन रोकने और गांव वापस लौटे प्रवासियों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए धामी सरकार ने एक बड़ा खाका तैयार किया है। ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग अब पूरे प्रदेश में ‘प्रवासी पंचायतों’ का आयोजन करने जा रहा है। इन पंचायतों की शुरुआत आगामी अप्रैल माह में सीमांत जिले पिथौरागढ़ से होगी।
मुख्यमंत्री के निर्देशों पर एक्शन प्लान
पलायन आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. शरद सिंह नेगी ने बताया कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक उच्च स्तरीय बैठक में निर्देश दिए थे कि प्रदेश में जो लोग वापस लौटे हैं, उनके साथ सीधा संवाद किया जाए। इसी क्रम में आयोग गांव-गांव जाकर उन लोगों को स्थानीय स्तर पर उद्योग और व्यवसाय स्थापित करने के लिए प्रेरित करेगा।
देव पूजा और मेलों के समय जुटेंगे प्रवासी
आयोग की रणनीति है कि प्रवासियों से तब संपर्क किया जाए जब वे अपने मूल गांव में मौजूद हों। डॉ. नेगी ने कहा कि गर्मियों के दौरान बड़ी संख्या में प्रवासी अपने कुल देवताओं की पूजा करने और स्थानीय मेलों में शामिल होने गांव आते हैं। इसी समय का लाभ उठाते हुए उन्हें सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी और गांव में ही रुककर स्वरोजगार शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
6 हजार लोगों ने किया ‘रिवर्स पलायन’
आयोग के आंकड़ों के अनुसार, कोविड काल से लेकर अब तक प्रदेश के विभिन्न जिलों में लगभग 6 हजार लोगों ने रिवर्स पलायन किया है । सरकार का लक्ष्य इस संख्या को बढ़ाना और जो लोग लौट चुके हैं उन्हें वहीं टिके रहने के साधन उपलब्ध कराना है। इस अभियान में राज्य के भीतर और राज्य के बाहर रह रहे प्रवासियों को भी आमंत्रित किया जाएगा।
