डॉ. नित्यानंद जन्मशताब्दी
दून विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्यमंत्री ने दी श्रद्धांजलि; पलायन और बदलती डेमोग्राफी पर जताई चिंता।
देहरादून| मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को दून विश्वविद्यालय, केदारपुर में डॉ. नित्यानंद के जन्मशताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रतिभाग किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने डॉ. नित्यानंद के जीवन संघर्षों और हिमालयी क्षेत्रों के प्रति उनके समर्पण को याद करते हुए उन्हें एक दूरदर्शी व्यक्तित्व बताया।
हिमालय और पर्यावरण का संतुलन जरूरी
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. नित्यानंद जी ने अपना पूरा जीवन हिमालय, पर्यावरण और सीमांत क्षेत्रों की बेहतरी के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने बहुत पहले ही हिमालयी क्षेत्रों में विकास और पर्यावरण संतुलन के बीच जिस सामंजस्य की बात कही थी, वह आज के समय में और भी अधिक प्रासंगिक हो गई है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि डॉ. नित्यानंद के नाम से संचालित शोध केंद्र को राज्य सरकार और अधिक विस्तार देगी ताकि विकास और पर्यावरण के क्षेत्र में शोध कार्य आगे बढ़ सकें।
पलायन और डेमोग्राफी पर दी चेतावनी
मुख्यमंत्री ने डॉ. नित्यानंद के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि सीमांत क्षेत्रों में गिरती डेमोग्राफी और पलायन को लेकर उनकी सोच आज हमारे लिए एक बड़ी चेतावनी है। उन्होंने कहा कि सीमांत गांवों को सुरक्षित रखना और वहां से पलायन रोकना राज्य की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।
वाइब्रेंट विलेज से मिलेगी मजबूती
पलायन रोकने के प्रयासों पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘वाइब्रेंट विलेज’ योजना के माध्यम से सीमांत क्षेत्रों में सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। राज्य सरकार इन क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा मजबूत कर सुरक्षा को पुख्ता करने और पलायन पर प्रभावी रोक लगाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
