हरिद्वार स्थित प्रदेश कार्यालय में बढ़ी हलचल; भाजपा ने बताया वजूद खत्म, बसपा ने किया सरकार बनाने का दावा
हरिद्वार। उत्तराखंड की राजनीति में कभी ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभाने वाली बहुजन समाज पार्टी एक बार फिर अपने पुराने वैभव को पाने के लिए सक्रिय हो गई है। आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी ने अपने संगठन को धार देना शुरू कर दिया है। हरिद्वार स्थित बसपा के प्रदेश कार्यालय में सवा साल पहले ही चुनावी हलचल तेज हो गई है।
भीतरघातियों पर गाज, संगठन में बड़ा बदलाव
पार्टी हाईकमान ने सख्त रुख अपनाते हुए हाल ही में संगठन में व्यापक फेरबदल किए हैं। अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। वर्तमान में पार्टी की कमान चार प्रदेश प्रभारियों और एक प्रदेश अध्यक्ष के हाथों में है। बसपा नेताओं का दावा है कि इस बार ‘बूथ जीतो, चुनाव जीतो’ की रणनीति पर काम किया जा रहा है और युवाओं को बड़ी जिम्मेदारी दी जा रही है।
दावे और चुनौतियाँ
बसपा नेताओं का कहना है कि 2022 के चुनाव में पार्टी ने हरिद्वार जिले में दो सीटों पर जीत दर्ज की थी, जो यह साबित करता है कि जनता का विश्वास बसपा पर बना हुआ है। पार्टी नेता अब 2027 में किसी गठबंधन के बजाय अपने दम पर सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं।
हालाँकि, बसपा के लिए राह इतनी आसान नहीं है। पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रही अस्थिरता एक बड़ी चुनौती है। बार-बार प्रदेश नेतृत्व का बदलना और स्थानीय कार्यकर्ताओं के बजाय बाहरी चेहरों को तरजीह दिए जाने से जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं में असंतोष साफ देखा जा सकता है।
भाजपा का पलटवार: “शून्य पर सिमटेगी बसपा”
दूसरी ओर, सत्ताधारी दल भाजपा ने बसपा की इन तैयारियों को सिरे से खारिज कर दिया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि उत्तराखंड की देवभूमि में बसपा का अब कोई चुनावी अस्तित्व नहीं बचा है। भाजपा का दावा है कि 2027 के चुनाव में बसपा एक भी सीट नहीं जीत पाएगी और शून्य पर सिमट जाएगी।
“हमारा संगठन अब बूथ स्तर तक मजबूत हो रहा है। 2027 में बसपा युवाओं और हर वर्ग के सहयोग से उत्तराखंड में अपनी सरकार बनाएगी।” — बसपा प्रदेश नेतृत्व
