‘सहकारिता से शहरी-ग्रामीण एकता’ की थीम पर सजे स्टॉल; मुख्यमंत्री ने नाबार्ड की वार्षिक ऋण पुस्तक का किया विमोचन।
देहरादून। स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के उद्देश्य से राजधानी के रेंजर्स ग्राउंड में ‘सहकारिता मेले’ का आगाज हो गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दीप प्रज्वलित कर मेले का विधिवत उद्घाटन किया। इस वर्ष मेले का मुख्य विषय (थीम) ‘सहकारिता से शहरी-ग्रामीण एकता‘ रखा गया है, जो शहरों और गांवों के बीच के फासले को कम करने का प्रयास है।
स्वयं सहायता समूहों को मिलेगा बड़ा बाजार
मेले में प्रदेशभर के स्वयं सहायता समूहों (SHGs) द्वारा तैयार हस्तशिल्प, जैविक उत्पाद और पहाड़ी व्यंजनों के स्टॉल लगाए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मेला न केवल उत्पादों की बिक्री का जरिया है, बल्कि विभागीय योजनाओं के प्रचार-प्रसार का भी सशक्त माध्यम है। उन्होंने स्थानीय उत्पादों को राज्य के आत्मसम्मान की जीवंत तस्वीर करार दिया।
नाबार्ड की पुस्तक का विमोचन
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने नाबार्ड (NABARD) द्वारा तैयार की गई वार्षिक ऋण पुस्तिका का भी विमोचन किया। यह पुस्तक राज्य में कृषि और ग्रामीण विकास हेतु ऋण वितरण के व्यवस्थित लेखे-जोखे और भविष्य की रणनीति को दर्शाती है।
‘भाई-भतीजावाद’ से मुक्त हुई सहकारिता
पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि कुछ साल पहले तक सहकारिता क्षेत्र का लाभ केवल एक ही परिवार तक सीमित रहता था और यह विभाग ‘भाई-भतीजावाद’ की भेंट चढ़ा हुआ था। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि आज सहकारिता को सही मायने में जनता को सौंपा गया है। सहकारिता का महत्व अब इतना बढ़ चुका है कि इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिल रही है।
मेले के मुख्य आकर्षण:
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स्थानीय उत्पाद: पहाड़ी दालें, शहद, ऊनी वस्त्र और जैविक मसाले।
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योजनाओं की जानकारी: सहकारिता विभाग की ऋण योजनाओं के लिए विशेष हेल्प डेस्क।
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सांस्कृतिक एकता: ग्रामीण परिवेश और शहरी मांग का अनूठा संगम।
