उम्मीद पोर्टल पर अभी तक उत्तराखंड में सिर्फ 20% संपत्ति ही हो पाई दर्ज, वक्फ बोर्ड परेशान
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को UMEED पोर्टल पर वक्फ प्रॉपर्टी की जानकारी अपलोड करने की समय सीमा बढ़ाने का आदेश देने से मना कर दिया है. कोर्ट ने साफ कहा कि वक्फ एक्ट की धारा 3B के तहत समय-सीमा बढ़ाने का अधिकार सिर्फ वक्फ ट्रिब्यूनल को है, इसलिए आगे की कोई भी राहत ट्रिब्यूनल से ही मिल सकती है।
इस फैसले के बाद उत्तराखंड वक्फ बोर्ड की मुश्किलें बढ़ गई हैं। राज्य में अभी तक महज 20 फीसदी वक्फ संपत्तियों को ही उम्मीद पोर्टल पर अपलोड किया जा सका है। बोर्ड का कहना है कि पोर्टल लगातार खराब रहने और तकनीकी दिक्कतों की वजह से काम नहीं हो पाया।
सोमवार को नेशनल मुस्लिम एडवोकेट्स हेल्प फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी देहरादून को ज्ञापन सौंपकर मांग की कि केंद्र सरकार समय-सीमा बढ़ाए ताकि सभी वक्फ संपत्तियां सुरक्षित हो सकें।
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने बताया, “उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर तुरंत वक्फ ट्रिब्यूनल गठित करने की मांग की है। ट्रिब्यूनल बनते ही हम समय-सीमा बढ़वाने के लिए अर्जी देंगे। अभी 5 दिसंबर की डेडलाइन है. लेकिन पोर्टल की खराबी के चलते काम पूरा होना मुश्किल है।”
गौरतलब है कि उम्मीद पोर्टल 6 जून को लॉन्च हुआ था। नियम 3 जुलाई को नोटिफाई हुए। सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ संशोधन एक्ट के कुछ प्रावधानों पर 16 सितंबर को अंतरिम रोक लगाई थी. जिसके बाद एक्ट लागू होने पर 6 महीने का समय दिया गया। अब यह समय सीमा 5 दिसंबर को खत्म हो रही है।
