हर चार साल में होने वाली इस गणना में आधुनिक कैमरा ट्रैप तकनीक का इस्तेमाल, WII ने दिया विशेष प्रशिक्षण
नई दिल्ली| देश के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों के तहत, हर चार वर्ष में की जाने वाली राष्ट्रीय बाघ गणना (टाइगर सेंसस) की प्रक्रिया आज से औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। इस महत्वपूर्ण गणना का उद्देश्य देश के सभी प्रमुख टाइगर रिजर्व और वन क्षेत्रों में बाघों की संख्या, उनके
आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धति
इस बार की बाघ गणना में आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक तरीकों पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि आंकड़े पूरी तरह सटीक और विश्वसनीय हों।
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प्रशिक्षण: टाइगर सेंसस के लिए वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) द्वारा वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, जिसमें डेटा संग्रह और विश्लेषण के वैज्ञानिक पहलुओं को समझाया गया।
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कैमरा ट्रैप तकनीक: गणना में कैमरा ट्रैप तकनीक को प्रमुख रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसे बाघों की पहचान के लिए सबसे भरोसेमंद माना जाता है।
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पहचान का आधार: विशेषज्ञ बताते हैं कि हर बाघ की धारियां इंसान के फिंगर प्रिंट की तरह पूरी तरह यूनिक होती हैं। कैमरा ट्रैप से ली गई तस्वीरों में इन्हीं धारियों के पैटर्न के आधार पर एक-एक बाघ की सही पहचान संभव हो पाती है।
यह पद्धति न केवल बाघों की वास्तविक संख्या बताती है, बल्कि उनके क्षेत्र, आवास और गतिविधियों से जुड़ा महत्वपूर्ण डेटा भी प्रदान करती है।
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में 550 से अधिक कैमरा ट्रैप
बाघों के उच्च घनत्व के लिए विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में भी गणना का कार्य शुरू हो चुका है।
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कॉर्बेट का महत्व: कॉर्बेट को दुनिया के प्रमुख टाइगर आवासों में गिना जाता है, जहाँ पिछली गणना के अनुसार 260 से अधिक बाघों की उपस्थिति दर्ज की गई थी। पूरे उत्तराखंड राज्य में बाघों की संख्या लगभग 560 बताई जाती है।
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डिप्टी डायरेक्टर का बयान: कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर राहुल मिश्रा ने बताया कि कॉर्बेट में बाघ गणना का कार्य आज से शुरू हो गया है। यह गणना तीन चरणों में पूरी की जाएगी।
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प्रयास: सटीक आंकड़े सुनिश्चित करने के लिए रिजर्व क्षेत्र में 550 से अधिक कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं।
यह राष्ट्रीय गणना केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि बाघों की बढ़ती या घटती संख्या के आधार पर भविष्य की संरक्षण नीतियों और वन्यजीव प्रबंधन की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
वितरण क्षेत्र और मूवमेंट पैटर्न का वैज्ञानिक आकलन करना है।
