‘आउटसोर्स और जान-पहचान वालों को मिल रही नौकरी, काबिल युवा दर-दर भटकने को मजबूर’—बेरोजगार संघ का सरकार पर प्रहार।
देहरादून। उत्तराखंड में आउटसोर्सिंग और बैकडोर भर्तियों के खिलाफ बेरोजगार युवाओं का गुस्सा फूट पड़ा है। सोमवार को उत्तराखंड बेरोजगार संघ के बैनर तले सैकड़ों युवाओं ने सचिवालय कूच कर सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। युवाओं का आरोप है कि विभिन्न विभागों में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया को दरकिनार कर चहेतों को ‘पिछले दरवाजे’ से नियुक्तियां दी जा रही हैं, जिससे प्रदेश के लाखों योग्य बेरोजगारों का भविष्य अंधकार में है।
आयोगों की सार्थकता पर उठाए सवाल
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे बेरोजगार संघ के अध्यक्ष राम कंडवाल ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार भर्ती आयोगों (UKPSC/UKSSSC) पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर विभागों में आउटसोर्सिंग और बैकडोर के माध्यम से भर्तियां की जा रही हैं। कंडवाल ने पूछा:
“जब नियमित आयोगों से भर्तियां नहीं निकाली जा रही हैं, तो इन आयोगों पर जनता के पैसे की बर्बादी क्यों की जा रही है? नेता और रसूखदार लोग अपने जान-पहचान वालों को विभागों में फिट कर रहे हैं।”
उपनल और परमानेंट की मांग पर विवाद
बेरोजगार संघ ने उपनल (UPNL) के माध्यम से होने वाली भर्तियों और उसके बाद उठने वाली नियमितीकरण की मांग पर भी चिंता जताई। संघ का कहना है कि इस ‘शॉर्टकट’ प्रक्रिया से प्रदेश के उन 10 लाख युवाओं के साथ अन्याय हो रहा है जो दिन-रात प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
10 लाख बेरोजगारों का भविष्य दांव पर
प्रदर्शनकारियों ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि उत्तराखंड में वर्तमान में 10 लाख से अधिक पंजीकृत बेरोजगार युवा हैं। यदि सरकार ने जल्द ही पारदर्शी भर्ती कैलेंडर जारी नहीं किया और बैकडोर भर्तियों पर रोक नहीं लगाई, तो आने वाले समय में प्रदेशव्यापी उग्र आंदोलन किया जाएगा।
प्रमुख मांगें:
-
सभी विभागों में आउटसोर्स और बैकडोर भर्तियों पर तत्काल रोक लगे।
-
रिक्त पदों पर लोक सेवा आयोग और चयन आयोग के माध्यम से नियमित भर्ती हो।
-
पारदर्शी भर्ती नीति और समयबद्ध परीक्षा कैलेंडर जारी किया जाए।
भारी पुलिस बल की मौजूदगी में सचिवालय कूच कर रहे युवाओं को बैरिकेडिंग लगाकर रोका गया, जिसके बाद युवाओं ने वहीं धरने पर बैठकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
