जशोधर भट्ट
देहरादून | राजधानी के खुड़बुड़ा निवासी 19 वर्षीय युवक प्रणव की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब गरमाता जा रहा है। परिजनों ने इसे महज एक दुर्घटना मानने से साफ इनकार करते हुए ‘हत्या’ का दावा किया है। वाल्मीकि समाज के भारी आक्रोश और पुलिस पर लगे गंभीर आरोपों के बाद, अब आईजी गढ़वाल ने मामले की जांच सीओ प्रेमनगर को सौंप दी है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, खुड़बुड़ा निवासी प्रणव (19 वर्ष), जो पेशे से वीडियो एडिटर था, बीती 3 जनवरी की रात करीब 8 बजे शिमला बायपास स्थित अपनी एक महिला मित्र के घर गया था। देर रात तक जब वह घर वापस नहीं लौटा, तो परिजन चिंतित हो गए। इसी बीच उन्हें सूचना मिली कि प्रणव छत से गिर गया है और उसे गंभीर हालत में श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल ले जाया गया है। परिजन जब तक अस्पताल पहुंचे, डॉक्टरों ने प्रणव को मृत घोषित कर दिया था।
परिजनों के गंभीर आरोप: “रिपोर्ट तक दर्ज नहीं की”
मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि यह हादसा नहीं बल्कि सोची-समझी साजिश के तहत की गई हत्या है। उन्होंने प्रणव की मित्र रिया कैंतुरा और उसके साथियों पर हत्या का शक जताया है। परिजनों का सबसे बड़ा आरोप पटेलनगर थाना पुलिस पर है। उनका कहना है कि थाना प्रभारी ने मामले में लीपापोती करने की कोशिश की और उनकी शिकायत पर रिपोर्ट दर्ज करने तक से मना कर दिया।
वाल्मीकि समाज में आक्रोश, कैंडल मार्च निकाल माँगा न्याय
चूंकि मृतक वाल्मीकि समाज से था, इसलिए इस घटना के बाद समाज के लोगों में भारी गुस्सा है। दोषियों की गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर समाज के लोगों ने शहर में जोरदार प्रदर्शन किया और कैंडल मार्च निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया।
न्याय की उम्मीद में मृतक के परिजनों ने आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप से मुलाकात की और उन्हें पुलिस की ढिलाई से अवगत कराया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आईजी ने तुरंत प्रभाव से जांच का जिम्मा सीओ प्रेमनगर को सौंप दिया है। फिलहाल पुलिस इसे दुर्घटना मानकर चल रही है, लेकिन परिजनों के दबाव के बाद अब जांच के नए सिरे से शुरू होने की उम्मीद है।
