सरकारें थपथपाती हैं पीठ, पर देवाल के ऐरठा गांव में आज भी नहीं पहुँची सड़क; वर्षों पुरानी मांग अधूरी
चमोली\देवाल। एक ओर जहाँ राज्य और केंद्र सरकारें सड़कों का जाल बिछाने का दावा कर अपनी पीठ थपथपाती हैं, वहीं पहाड़ के कई ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी मोटर मार्गों के अभाव में ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जनपद चमोली के देवाल ब्लॉक स्थित ऐरठा गांव से आया ताजा मामला सरकारी दावों की सच्चाई बयाँ करता है, जहाँ एक बीमार व्यक्ति को पाँच किलोमीटर तक तंग और चट्टानी पगडंडियों से डंडी-कंडी के सहारे अस्पताल पहुँचाना पड़ा।
जान जोखिम में डालकर ले जाया गया बीमार|
देवाल ब्लॉक के अनुसूचित जाति बाहुल्य गांव ऐरठा के चालीस वर्षीय पूरन राम की तबियत अचानक खराब हो गई। सड़क न होने के कारण ग्रामीणों ने उन्हें कंधे पर लादकर 5 किलोमीटर का दुर्गम पहाड़ी रास्ता तय किया और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक पहुँचाया। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें हायर सेंटर के लिए रैफर किया गया है।
तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि ग्रामीण किस तरह ऊँची पहाड़ी, तंग रास्ते और नीचे पिंडर नदी की गहरी खाई के किनारे से गुजर रहे हैं। जरा सी चूक बड़ी अनहोनी को जन्म दे सकती है।
छात्र-छात्राएँ भी करते हैं जान जोखिम में डाल कर सफर|
सड़क के अभाव में ऐरठा गांव के स्कूली बच्चे भी हर दिन अपने स्कूल-कॉलेजों के लिए 5 किलोमीटर दूर देवाल तक इसी चट्टानी और जंगल वाले पैदल रास्ते को तय करने को मजबूर हैं। अभिभावकों को उनके आने-जाने तक चिंता सताए रहती है।
आज भी डंडी-कंडी के सहारे: मोटर मार्गों के अभाव के चलते प्रसूता महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार लोगों को आज भी डंडी-कंडी के सहारे शहरों के अस्पतालों तक लाना पड़ता है, जिसमें कई बार मरीजों और गर्भवती महिलाओं को जान तक गंवानी पड़ी है।
ग्रामीणों की वर्षों पुरानी सड़क की मांग आज भी धरातल पर नहीं उतर पाई है। यह घटना दर्शाती है कि पहाड़ के लोगों की नियति अपनी जान को जोखिम में डालकर जीने की बन गई है।
