सिद्ध पीठ देवराडा से कुरूड के लिए शुरू हुई माँ नंदा की डोली यात्रा; उत्तरायणी के पावन पर्व पर मायके पहुँचेंगी ‘राजराजेश्वरी’।
देवराडा/कुरूड। उत्तराखंड की आराध्य देवी, माँ राजराजेश्वरी नंदा देवी की छह माह की लोक-यात्रा का शुभारंभ आज बड़े ही हर्षोल्लास के साथ हुआ। सिद्ध पीठ देवराडा (ननिहाल) में विधिवत पूजा-अर्चना और शुभ लग्नानुसार अनुष्ठान संपन्न होने के बाद, माँ नंदा की प्रतीक डोली अपने मायके ‘सिद्ध पीठ कुरूड’ के लिए प्रस्थान कर चुकी हैं। इस विदाई बेला में हजारों भक्तों की आँखें नम थीं, तो वहीं गगनभेदी जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया।
विद्वान ब्राह्मणों ने संपन्न कराई पूजा
कुरूड से माँ नंदा को लेने आए मुख्य पुजारी गौड़ ब्राह्मणों के दल ने देवराडा सिद्ध पीठ में विशेष पूजा-अर्चना की। मंत्रोच्चारण और शंखध्वनि के बीच जैसे ही माँ की डोली उठी, हजारों श्रद्धालुओं का हजूम उनके साथ चल पड़ा। परंपरा के अनुसार, माँ नंदा अपने ननिहाल से विदा होकर विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए ठीक उत्तरायणी के पावन पर्व पर अपने मायके कुरूड पहुँचेंगी।
ग्रामीणों ने पलक-पावड़े बिछाकर किया स्वागत
यात्रा के पहले दिन का दृश्य अत्यंत मनोरम रहा:
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पहला पड़ाव (सुनाऊ मल्ला): दोपहर में माँ की डोली ग्राम पंचायत सुनाऊ मल्ला पहुँची, जहाँ ग्रामीणों ने सामूहिक पूजा-अर्चना कर माँ का आशीर्वाद लिया। गाँव वालों ने श्रद्धापूर्वक नंदा भक्तों और पुजारियों के लिए भंडारे का आयोजन किया।
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रात्रि प्रवास (बज्वाड़): शाम को सुनाऊ मल्ला के ग्रामीणों ने गाजे-बाजे के साथ माँ नंदा को अगले पड़ाव ग्राम पंचायत बज्वाड़ तक पहुँचाया, जहाँ माँ की डोली रात्रि प्रवास करेगी।
6 महीने कुरूड में देंगी दर्शन
मान्यता है कि माँ नंदा अगले छह महीनों तक सिद्ध पीठ कुरूड में ही विराजमान रहेंगी। इस अवधि के दौरान दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु माँ के दर्शन कर सकेंगे और उनका आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। उत्तराखंड की संस्कृति में इस यात्रा का विशेष आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व है, जो समुदायों के बीच आपसी प्रेम और श्रद्धा को जोड़ती है।
यात्रा के मुख्य आकर्षण:
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परंपरा: ननिहाल (देवराडा) से मायके (कुरूड) की ऐतिहासिक विदाई।
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भक्तों का हुजूम: डोली के साथ हजारों की संख्या में पैदल चल रहे श्रद्धालु।
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लक्ष्य: उत्तरायणी पर्व पर कुरूड में प्रवेश।
