देहरादून रामनगर। देश में हर चार साल में होने वाली राष्ट्रीय बाघ गणना 2026 की तैयारियां जोरों पर हैं। इसी कड़ी में वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) ने सोमवार को जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के चुनाखान ईको टूरिज्म सेंटर में उत्तराखंड वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, फील्ड स्टाफ और जूनियर रिसर्च फेलो को दो दिनो का विशेष प्रशिक्षण दिया।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि 2026 की गणना में एकसमान वैज्ञानिक पद्धति का पालन हो और बाघों की संख्या में कोई त्रुटि न रहे। प्रशिक्षण में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के अलावा राजाजी टाइगर रिजर्व व अन्य टाइगर हैबिटेट वाले क्षेत्रों के अधिकारी शामिल हुए।
प्रशिक्षण में डब्ल्यूआईआई के वैज्ञानिकों ने कैमरा ट्रैपिंग की नई तकनीक, फील्ड सर्वे, डाटा रिकॉर्डिंग, जीआईएस मैपिंग और बाघों की धारियों के आधार पर व्यक्तिगत पहचान की बारीकियां विस्तार से समझाईं। और अब अधिकारी ये प्रशिक्षित आगे अपने-अपने वन प्रभागों में फ्रंटलाइन स्टाफ को देंगे, ताकि पूरे देश में एक ही स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल का पालन हो।
इस बार भी कैमरा ट्रैप तकनीक को मुख्य आधार बनाया जा रहा है। हर बाघ की धारियां इंसान के फिंगरप्रिंट की जैसी पूरी तरह अलग होती हैं, जिससे एक ही बाघ की दोहरी गिनती की संभावना खत्म हो जाती है। इससे न केवल बाघों की सटीक संख्या पता चलती है, बल्कि उनका वितरण, मूवमेंट पैटर्न और प्रीडेटर-प्रे बैलेंस का भी वैज्ञानिक डेटा मिलता है।
जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में वर्तमान में यहां 260 से ज्यादा बाघ हैं, जो इसे विश्व का सबसे अधिक बाघ घनत्व वाला रिजर्व बनाता है। इससे पहले 2022 के सेंसस में भारत में कुल 3,682 बाघ गिने गए थे और इसमें कॉर्बेट का योगदान सबसे बड़ा रहा था।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नई गणना के आंकड़े जनवरी-फरवरी 2026 तक आने की उम्मीद है। ये आंकड़े अगले दशक की टाइगर संरक्षण नीति, नए रिजर्व बनाने और कॉरिडोर सुरक्षित करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में शुरू किया था ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ को नई ऊंचाई देने का अभियान
2022 में PM ने खुद रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में घोषणा की थी कि भारत ने 1973 के मुकाबले बाघों की संख्या चौगुनी करने का लक्ष्य 9 साल पहले ही हासिल कर लिया है।


