बिजली-पानी के बिल माफ होने की गलत सूचना पर राष्ट्रीय लोक अदालत पहुँची भीड़, अधिवक्ताओं ने किया भ्रम दूर
रामनगर। शनिवार को रामनगर कोर्ट परिसर में उस समय भारी अफरा-तफरी मच गई, जब बिजली और पानी के बिलों में छूट या माफी की अफवाह के चलते सैकड़ों लोग राष्ट्रीय लोक अदालत में पहुँच गए। बाद में न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं से जानकारी मिलने पर पता चला कि यह सूचना सोशल मीडिया और मौखिक चर्चाओं के माध्यम से फैलाई गई थी, जिसके कारण आम जनता भ्रमित होकर कोर्ट पहुँची थी।
अफवाह और हकीकत:
अधिवक्ता दीपक जोशी ने इस भ्रम को दूर करते हुए बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य सामान्य बिजली-पानी के बिलों को कम करना या माफ करना नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोक अदालत में मुख्य रूप से:
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वाहनों के चालान
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एक्साइज एक्ट से जुड़े मामले
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समझौता योग्य सिविल केस
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बिजली विभाग के केवल चोरी, विभागीय मुकदमे या न्यायालय में लंबित मामले
जैसे मामलों का निपटारा किया जाता है, न कि नियमित घरेलू बिलों का।
वर्चुअल कोर्ट का भ्रम:
अधिवक्ता जोशी ने यह भी बताया कि अधिकांश ट्रैफिक चालान अब वर्चुअल कोर्ट नैनीताल के माध्यम से निपटाए जा रहे हैं, जबकि जनता को इसकी सही जानकारी नहीं है और वे रामनगर कोर्ट पहुँच रहे हैं।
टेंपो चालक मोहम्मद फरीद ने बताया कि वह कैमरे से हुए ₹5000 के चालान को निपटाने आए थे, लेकिन उन्हें पता चला कि यह चालान नैनीताल के वर्चुअल कोर्ट में जमा होगा। वहीं, अमिर नामक व्यक्ति ने बताया कि बिल कम होने की उम्मीद में आने पर पता चला कि यहाँ केवल नोटिस वाले मामलों पर विचार होता है।
स्थानीय वर्चुअल कोर्ट की मांग:
अधिवक्ता दीपक जोशी ने मांग की कि रामनगर में भी वर्चुअल कोर्ट की एक शाखा होनी चाहिए, ताकि स्थानीय लोगों को छोटे चालानों के निपटारे के लिए नैनीताल तक की यात्रा न करनी पड़े।
जागरूकता की कमी:
अधिवक्ता अतुल अग्रवाल ने कहा कि 13 दिसंबर को पूरे देश में लोक अदालत थी, लेकिन रामनगर क्षेत्र में यह अफवाह फैल गई कि नियमित बिलों में छूट मिलेगी। इसी भ्रम के चलते भीड़ जुटी, जबकि रामनगर कोर्ट में ऐसे मामलों के निस्तारण के लिए न तो प्रावधान था और न ही संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद थे।
गलत सूचना और जागरूकता की कमी के कारण लोगों को निराश होकर लौटना पड़ा। प्रशासन और न्यायिक व्यवस्था से अब अपेक्षा है कि लोक अदालत और वर्चुअल कोर्ट की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट और समय पर जानकारी आम जनता तक पहुँचाई जाए।
