कार्यकर्ताओं ने तहसील मुख्यालय तक किया प्रदर्शन; जिलाधिकारी को भेजा ज्ञापन, महात्मा गांधी के नाम को हटाने को बताया राष्ट्रपिता का अपमान
अल्मोड़ा। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के नाम को बदलने के कथित प्रस्ताव के खिलाफ स्याल्दे में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपनी आवाज बुलंद की है। कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष सुन्दर सिंह नेगी के नेतृत्व में दर्जनों कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया और तहसील प्रशासन के माध्यम से जिलाधिकारी अल्मोड़ा को ज्ञापन सौंपा।
विरोध प्रदर्शन की शुरुआत स्याल्दे बाजार से हुई, जहां से कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एक विशाल जुलूस निकाला। प्रदर्शनकारी हाथों में तख्तियां लेकर सरकार की नीतियों के विरोध में नारेबाजी करते हुए तहसील मुख्यालय पहुंचे। कार्यकर्ताओं का स्पष्ट कहना है कि वे इस योजना के मूल स्वरूप और नाम के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे।
“जनता को गुमराह कर रही है सरकार”
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए ब्लॉक अध्यक्ष सुन्दर सिंह नेगी ने तीखे हमले किए। उन्होंने कहा:
“मनरेगा एक जनकल्याणकारी योजना है जिसने ग्रामीण भारत की तस्वीर बदली है। इसका नाम बदलने का प्रस्ताव भाजपा सरकार की उस नीति का हिस्सा है जिसके तहत वह जनता को असली मुद्दों से गुमराह करना चाहती है।”
उन्होंने आगे कहा कि योजना से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम हटाना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि यह उनके प्रति भारी अपमान को भी दर्शाता है।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की है कि इस प्रस्ताव को तत्काल वापस लिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने अपना फैसला नहीं बदला, तो वे इस आंदोलन को और उग्र करेंगे। कांग्रेस का तर्क है कि मनरेगा न केवल रोजगार का साधन है, बल्कि यह गांधीवादी विचारधारा और ग्रामीण सशक्तिकरण का प्रतीक भी है।
