हरिद्वार। साल के आखिरी स्नान पर्व पौष अमावस्या के अवसर पर धर्मनगरी हरिद्वार में श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। कड़ाके की ठंड के बावजूद देश के कोने-कोने से आए लाखों श्रद्धालुओं ने मां गंगा के पावन तटों पर स्नान कर पुण्य लाभ कमाया। तड़के सुबह से ही हर की पौड़ी सहित ब्रह्मकुंड और अन्य प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
भक्तिमय हुआ वातावरण
स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने घाटों पर दीपदान किया और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। पूरे घाट परिसर में “हर-हर गंगे” और “जय मां गंगे” के उद्घोष सुनाई दे रहे थे, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने गंगा पूजन के साथ-साथ गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न व वस्त्रों का दान भी किया।
पितृ तर्पण और दान का विशेष महत्व
तीर्थ पुरोहित पंडित जितेंद्र शास्त्री के अनुसार, पौष अमावस्या का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी माना जाता है। उन्होंने बताया कि इस दिन गंगा स्नान और पितरों के निमित्त तर्पण करने से पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है। इस दिन दीपदान करने से जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम, ट्रैफिक डायवर्ट
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे।
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सुरक्षा: सभी प्रमुख घाटों पर जल पुलिस और नागरिक पुलिस के जवान तैनात रहे।
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यातायात: शहर में जाम की स्थिति न बने, इसके लिए पुलिस ने पहले से ही डायवर्जन प्लान लागू किया था, जिससे बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों को निर्धारित पार्किंग स्थलों पर ही रोका गया।
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निगरानी: सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए भी भीड़ की निगरानी की गई।
