देहरादून। अपनी स्वच्छ आबोहवा और वादियों के लिए मशहूर देहरादून अब प्रदूषण की गंभीर मार झेल रहा है देहरादून में इस साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जिससे शहर की हवा ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंच गई है। केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों ने प्रशासन और आम जनता की चिंता बढ़ा दी है।
खतरे के निशान पर वायु गुणवत्ता
उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UEPPCB) के अनुसार, मंगलवार को दून का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 299 दर्ज किया गया, जबकि बुधवार को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के बुलेटिन में यह 294 रहा। वायु में PM 2.5 का स्तर 119.83 और PM 10 का स्तर 134.11 पहुंच गया है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। इसकी तुलना में काशीपुर का AQI 128 और ऋषिकेश का 85 रहा, जिससे स्पष्ट है कि राजधानी की स्थिति पड़ोसी शहरों से कहीं अधिक चिंताजनक है।
क्यों जहरीली हो रही है दून की हवा?
दून यूनिवर्सिटी के पर्यावरणविद् डॉ. विजय श्रीधर (असिस्टेंट प्रोफेसर) ने बताया कि प्रदूषण बढ़ने के पीछे मुख्य कारण मौसम में बदलाव और हवा में स्थिरता है।
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PM 2.5 की अधिकता: बारिश न होने के कारण हवा में सूक्ष्म कण (Fine Particulate Matter) जमा हो रहे हैं।
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मानवीय गतिविधियां: बढ़ता ट्रैफिक, जगह-जगह जलने वाले बोनफायर और कूड़ा जलाना इस स्थिति को और भयावह बना रहे हैं।
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भौगोलिक स्थिति: रात के समय हवा स्थिर होने से प्रदूषक तत्व जमीन के करीब ही रुक जाते हैं।
बारिश की उम्मीद नहीं, बढ़ सकता है कोहरा
मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून के निदेशक सी. एस. तोमर के अनुसार, फिलहाल मैदानी इलाकों में बारिश की कोई संभावना नहीं है। आने वाले दिनों में कोहरा छाने से हवा की गुणवत्ता और भी बिगड़ सकती है। तेज हवाएं या बारिश ही इस प्रदूषण को कम कर सकती हैं, लेकिन अगले 48 घंटों तक इसके आसार कम हैं।विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हालात ऐसे ही रहे, तो उत्तराखंड के लोगों को भी दिल्ली जैसी दमघोंटू हवा का सामना करना पड़ सकता है। बच्चों और बुजुर्गों को सुबह की सैर से बचने की सलाह दी गई है।
