देहरादून: राजधानी के सबसे व्यस्त दून अस्पताल में अब मरीजों को लंबी लाइनों से निजात दिलाने के लिए ‘आभा आईडी’ संजीवनी साबित हो रही है। केंद्र सरकार की इस डिजिटल पहल को लेकर अस्पताल प्रशासन ने व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं।
दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रविंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि ‘आभा आईडी’ एक अत्यंत अभिनव (Innovative) पहल है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि मरीज का पूरा मेडिकल डेटा डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगा। एक बार आईडी बनने के बाद मरीज का इलाज, दवाइयां और टेस्ट रिपोर्ट इसी आईडी से लिंक हो जाएंगी, जिससे उन्हें बार-बार भारी-भरकम फाइलें या पुराने पर्चे लेकर घूमने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 2,500 से 3,000 मरीज पहुंचते हैं। डॉ. बिष्ट के अनुसार, मात्र 6 घंटे के भीतर इतने विशाल जनसमूह को मैनेज करना एक बड़ी चुनौती होती है।
-
घर बैठे बनेगा पर्चा: मरीज ऐप के माध्यम से घर बैठे ही अपना टोकन और पर्चा जनरेट कर सकते हैं।
-
समय की बचत: अस्पताल पहुँचकर सीधे डॉक्टर को दिखाया जा सकेगा, जिससे पंजीकरण काउंटर की भीड़ कम होगी।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शुरुआती दौर में कुछ मरीजों को आधार कार्ड या मोबाइल नंबर अपडेट न होने जैसी तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं। इसे देखते हुए वर्तमान में पुराना और नया दोनों सिस्टम एक साथ संचालित किए जा रहे हैं, ताकि किसी भी मरीज को इलाज के अभाव में वापस न जाना पड़े।
पिछले एक सप्ताह में इस सिस्टम को मरीजों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है और अब तक सैकड़ों आभा कार्ड बनाए जा चुके हैं। भीड़ के सुव्यवस्थित संचालन के लिए अस्पताल परिसर में अतिरिक्त स्टाफ और वॉलंटियर्स तैनात किए गए हैं, जो मरीजों को डिजिटल पंजीकरण की प्रक्रिया समझाने में मदद कर रहे हैं।
