विकसित भारत-ग्रामीण रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (VB-GRAM-G) के तहत ग्रामीण सशक्तिकरण पर जोर; नाम बदलने पर विपक्ष के आरोपों को बताया निराधार।
देहरादून। उत्तराखंड के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने ग्रामीण विकास और आजीविका की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए ‘विकसित भारत-ग्रामीण रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन’ (VB-GRAM-G) को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर वर्ष 2047 तक ‘समृद्ध भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों को सशक्त बना रही हैं।
रोजगार के दिनों में बढ़ोतरी और खेती को सहारा
योजना की मुख्य विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कृषि मंत्री ने बताया कि अब पंजीकृत परिवारों को साल में 100 दिन के स्थान पर 125 दिन का गारंटीशुदा रोजगार प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही, खेती के ‘पीक सीजन’ के दौरान मजदूरों की कमी की समस्या को हल करने के लिए सरकार ने एक विशेष रणनीति बनाई है।
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सरकार वर्ष में 60 दिन ऐसे तय करेगी, जब इस योजना के तहत कोई सरकारी कार्य नहीं होगा।
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इन 60 दिनों में मजदूर खेतों में काम कर सकेंगे, जिससे कृषि कार्यों में श्रमिकों की किल्लत नहीं होगी।
नाम बदलने पर विपक्ष को दिया करारा जवाब
मनरेगा (MGNREGA) का नाम बदलकर ‘VB-GRAM-G’ किए जाने पर विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर गणेश जोशी ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के आरोप पूरी तरह निराधार और तथ्यहीन हैं। मंत्री ने याद दिलाया कि:
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समय-समय पर केंद्र सरकारों ने योजनाओं के नाम बदले हैं।
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पूर्व में इस योजना का नाम ‘जवाहर रोजगार योजना’ भी रहा है, जिसे बाद में बदला गया।
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सरकार का एकमात्र मकसद इस योजना को और अधिक सशक्त और प्रभावी बनाना है।
2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ते कदम
मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस मिशन का उद्देश्य केवल रोजगार देना ही नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाना है। विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में यह मिशन एक मील का पत्थर साबित होगा।
